पिटोल से निर्भय सिंह ठाकुर की रिपोर्ट
सोशल मीडिया की सक्रियता ने 3 घंटे में गुमशुदा बालक को पहुंचाया स्वजनों के बीच।
घर वालों को पता ही नहीं सुबह से लापता था आकाश।
पिटोल । गुमशुदा बालक का पता ठीकाना ढुंढने में पिटोल पुलिस आस-पास के गांवों में पतारसी करने में तकरीबन 100 किमी के आस पास मुवमेंट कर गई। अलग अलग गांवों में बालक को साथ लेकर घूमे लेकिन कहीं कोई पता नहीं चला कि वह किस गांव का है। ओर किसका बालक है। आखिरकार पुलिस ने सोशल मीडिया का लाभ लिया। शाम होते ही सोशल मीडिया से फैली खबर के बाद स्वजन पिटोल पुलिस चौकी पहुंच गए। पिता ने बेटे के मिलते ही उसे गले लगा लिया। पुलिस ने तफ्तीश के बाद उसे स्वजनों के सुपुर्द कर दिया।
बालक के पिता रुपा पिता रत्ना मेडा ने बताया कि वह आकाश का पिता है ओर उसे उसके रिश्तेदार जो कि गुजरात एमपी बार्डर पर होमगार्ड है। उसने बताया कि ग्रुप पर आ रहा है कि उसका बेटा पिटोल पुलिस चोकी में है।
गुजरात के खंगेला जिला दाहोद के रहने वाले रुपा मेडा ने यह भी बताया कि उन्हें तो पता ही नहीं कि आकाश कब उनके गांव से एमपी के भीमफलिया पहुंच गया। वे तो ये ही समझ रहे थे कि गांव में शादीयां चल रही है कहीं जा कर खेल रहा होगा।
ईधर बालक को लेकर पुलिस परेशान थी क्योंकि बालक कुछ बता ही नहीं रहा था। न तो उसे अपना नाम पता था न माता पिता का। वह खंगेला की सरकारी प्राथमिक शाला में पढने भी जाता है।
पुलिसिया तंत्र की ऐसी रही सक्रियता।
चुंकि बालक युनिफार्म पहने हुए था आस पास की समस्त स्कुलों से संपर्क किया। बालक को लेकर चौकी आने वाले से पुछताछ की कि वह किस दिशा से आया है। उसने गुजरात की ओर से आना बताया। सरहदी पुलिस से संपर्क किया। दाहोद कंट्रोल रुम पर सुचना की गई। क्राईम ब्रांच को बताया गया।
इस दौरान स्थानीय पुलिस कर्मी एसआई अशोक बघेल, एएसआई सुरसिंह चैहान, उमेश मकवाना, प्रआ दिलीप, डावर, विरेन्द्र, आरक्षक अजीत, नानुराम, कैलाश ने कांकरादरा, बावडीबडी, खेडी, मलवान, मसुरिया पिटोल व आधार स्टेशनों पर मशक्कत की। चौकी प्रभारी अशोक बघेल ने बताया कि सोशल मीडिया पर चली खबर की एक लिंक ने बालक को उसके स्वजनों तक पहुंचा दिया।
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